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ICAR - Central Institute of Post-Harvest Engineering & Technology
भा.कृ.अनु.प.- केन्द्रीय कटाई उपरान्त अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान AN ISO 9001:2015 CERTIFIED INSTITUTION (Formerly ISO 9001:2008 Certified)
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सिफेट, लुधियाना में राजभाषा हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह एवं त्रैमासिक हिंदी कार्यशाला

सिफेट, लुधियाना में राजभाषा हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह

 एवं त्रैमासिक हिंदी कार्यशाला के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार

आई.सी.ए.आर.-सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ़ पोस्ट-हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिफेट), लुधियाना द्वारा आयोजित राजभाषा हिंदी पखवाड़ा का समापन 28.09.2021 को किया गया। साथ ही त्रैमासिक हिंदी कार्यशाला का आयोजन भी हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों) से किया गया। इस कार्यशाला की विषय वस्तु ‘तकनीकी जानकारी का हिंदी में प्रचार- प्रसार’ रखा गया। इस कार्यशाला के दौरान डॉ.  विकास कुमार, वैज्ञानिक एवं प्रभारी राजभाषा प्रकोष्ट ने त्रैमासिक कार्यशाला की रूप रेखा प्रस्तुत की एवं डॉ. आर सी कसाणा, प्रधान वैज्ञानिक ने आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान संस्थान में हो रही गतिविधियिओं से अवगत कराया और आने वाले कार्यक्रम की जानकारी दी। इस अवसर पर आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित ‘मखाना की मूल्य-श्रृंखला’ पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार के दौरान ‘मखाना उत्पादन एवं बीज संग्रहण’ विषय पर डॉ. इंदु शेखर सिंह, प्रभारी, मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा ने प्रकाश डाला। संस्थान द्वारा विकसित प्रौद्योगिकियों पर चर्चा करते हुए डॉ आर के विश्वकर्मा ने ‘मखाना पॉपिंग का यंत्रीकरण एवं मखाना के मूल्यवर्धित उत्पाद’ विषय पर प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय वेबिनार के बाद श्री कुंवर सिंह, सदस्य सचिव, राजभाषा हिंदी पखवाड़ा ने  15.09.2021 से 28.09.2021 तक विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे कि हिंदी टिप्पण एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिता, हिंदी निबंध प्रतियोगिता, कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, हिंदी अनुवाद प्रतियोगिता, प्रार्थना पत्र लेखन प्रतियोगिता, विज्ञान सम्बन्धी शोध पत्र प्रतियोगिता, हिंदी काव्य पाठ प्रतियोगिता, तत्काल भाषण प्रतियोगिता आदि कार्यक्रमों के बारे में बताया एवं समन्वयक, निर्णायक एवं प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। हिंदी पखवाड़ा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. आर के सिंह ने अपने संबोधन में संस्थान के कार्मिकों द्वारा हिंदी में अच्छा कार्य करने और पखवाड़ा में उत्साहपूर्ण ढंग से भाग लेने के लिए प्रशंसा की और भविष्य में भी इसी तरह की भागीदारी की अपेक्षा की। डॉ. सिंह ने आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र को स्मरण करते हुए उनकी पंक्तियों ‘निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल’ को दोहराया और राजभाषा हिंदी के प्रचार, प्रसार एवं उपयोग को बढाने पर बल दिया। उन्होंने कहा की हिदी गौरव और आत्मसम्मान प्रदान करती है। संस्थान के निदेशक डॉ नचिकेत कोतवालीवाले ने पंद्रह दिवसीय हिंदी पखवाड़ा के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया एवं समापन समारोह के दौरान अपने वक्तव्य में हिंदी की महत्ता, इसकी वैज्ञानिक सहजता, भाषाई सरलता पर प्रकाश डालते हुए राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक उपयोग की अपील की। डॉ. कोतवालीवाले ने बताया की राजभाषा हिंदी अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा माध्यम है। सभी भारतीय भाषाओँ को एक सूत्र में पिरोने वाली राजभाषा भारतीय भाषाओँ में आपसी सामंजस्य, सम्मान और सौहार्द को बढाती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, डॉ इंदु शेखर सिंह, प्रभारी, मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा (बिहार) ने संस्थान द्वारा आयोजित विभिन्न गतिविधियों की प्रशंसा की, राजभाषा हिंदी के कार्यक्रमों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के उत्साहपूर्ण भागीदारी पर हर्ष व्यक्त किया और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को बधाई दी। हिंदी में अपने कार्य अनुभव का जिक्र करते हुए डॉ इंदु शेखर सिंह ने हिंदी की सरलता, सौम्यता एवं सरसता पर प्रकाश डाला एवं इसे माता जैसी सम्मान देने की बात कही  और उपस्थित लोगों से हिंदी में अधिकाधिक काम करने का आह्वान किया। हिंदी हृदय को हृदय से जोड़ने वाली राजभाषा है जो हम सबको एक सूत्र में पिरोने में मदद करती है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रभागाध्यक्ष के अलावा श्री विकास कुमार, वैज्ञानिक, राजभाषा प्रभारी एवं सदस्य सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति; श्री हजारी लाल मीना, वरिष्ठ प्रसाशनिक अधिकारी; श्री मन्नीलाल, वित्त एवं लेखाधिकारी एवं संस्थान के और संस्थान के बाहर से भी करीब 150 वैज्ञानिक, विद्यार्थी एवं उद्यमी प्रतिभागियों ने भाग लिया। डॉ. एस.एन. झा, सहायक उपनिदेशक (कृषि अभियांत्रिकी), भा.कृ.अनु.प., नई दिल्ली ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और किसानों और युवाओं को संस्थान से प्रशिक्षित होकर मखाने की कारोबार को बढ़ाने की बात कही। डॉ. पूनम ने आईसीएआर की गीत से कार्यक्रम की शुरुआत की और डॉ. प्रेरणा नाथ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

 

सिफेट, लुधियाना में राजभाषा हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह  एवं त्रैमासिक हिंदी कार्यशाला के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार